पंचवर्षीय योजना क्या है | 1-13 वीं पंचवर्षीय योजना भारत | Panchwarsiya Yojana

हमारे देश में सोवियत रूस से प्रभावित होकर Panchwarsiya Yojana को शुरू किया गया था। जिसको केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक पांच वर्ष में देश के नागरिको के सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति के लिए कार्यान्वित करते है। यह कार्यक्रम केंद्रीकृत एवं एकीकृत राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम है। साल 1947 से 2017 तक देश की अर्थव्यवस्था की प्लानिंग की अवधारणा में ये आधार रही है। पंचवर्षीय योजना को योजना आयोग एवं नीति आयोग के माध्यम से विकसित, कार्यान्वित एवं निष्पादित करने का कार्य होता है। देश के प्रधानमंत्री के पास इसकी अध्यक्षता एवं आयोग के पास एक मनोनीत उपाध्यक्ष होता था।

पंचवर्षीय योजना क्या है | 1-13 वीं पंचवर्षीय योजना भारत | Panchwarsiya Yojana
पंचवर्षीय योजना क्या है

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पंचवर्षीय योजना

देश में अभी तक 13 पंचवर्षीय योजनाएँ शुरू हो चुकी है। इस समय इस योजना के अंतर्गत देश में कृषि विकास एवं रोजगार सृजन के कार्यो पर ध्यान दिया जाता है। ये देश की राष्ट्रीय योजना है जिसको पूर्व समय तक ‘योजना आयोग’ जारी करता था किन्तु बाद में इस जिम्मेदारी को ‘नीति आयोग’ को दिया गया। नीति आयोग को 1 जनवरी 2015 में बनाया गया किन्तु पहले समय से भिन्न नीति आयोग के पास इस योजना में फण्ड आवंटित करने का अधिकार नहीं है। आयोग प्रदेशों की तरफ से कोई निर्णय भी नहीं ले सकता है और केवल सलाहकार संस्था की तरह से कार्य करेगा। इसका कार्य नागरिको के भविष्य में हितो की रक्षा के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित करना।

पंचवर्षीय योजना का इतिहास

पंचवर्षीय योजना एक केंद्रीय एवं एकीकृत राष्ट्रीय वित्तीय कार्यक्रम है जिसको साल 1928 जोसेफ स्टालिन ने सोवियत संघ के लिए पहली पंचवर्षीय योजना के रूप में शुरू किया था। ज्यादातर कम्युनिस्ट स्टेट एवं बहुत से पूँजीपतियों ने भी इसको अपना लिया था। इस समय चीन एवं भारत दोनों ही अपने यहाँ पंचवर्षीय योजना के कार्यक्रम को जारी करते है। यद्यपि चीन ने साल 2006 से 2010 में अपनी ग्यारवीं पंचवर्षीय योजना का नाम भी बदल दिया था। देश के प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू ने भी समाजवादी दृष्टिकोण को अपनाते हुए आजादी के बाद के वर्षों से ही पंचवर्षीय योजना को शुरू कर दिया था। इसके साथ ही एक अन्य लक्ष्य भी रखा गया था जिसमे उद्योग एवं खेती के विकास की आधारशीला रखना था और नागरिको को किफायती दरों पर चिकित्सीय सेवाएँ, सस्ती शिक्षा भी देना था।

प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956)

भारत में प्रथम पंचवर्षीय योजना को पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू के द्वारा 8 दिसम्बर 1951 के दिन देश की संसद में पेश किया था। यह योजना हैरोड डोमर मॉडल के ऊपर आधारित थी और इसके अंतर्गत सर्वाधिक ध्यान खेती के ऊपर दिया गया था। पहली योजना में गुलजारीलाल नंदा जी उपाध्यक्ष रहे थे। पहली पंचवर्षीय योजना का नारा ‘खेती का विकास’ और आजादी के बाद ही राष्ट्र का पुननिर्माण करना था। सबसे उत्तम बात तो यह रही कि इस योजना में वृद्धि का लक्ष्य 2.1 प्रतिशत रखा गया था किन्तु यह वृद्धि 3.6 प्रतिशत रही। इस योजना में कुल 2603 अरब का बजट आवण्टित हुआ था।

पहली योजना के अंतर्गत 2069 करोड़ के बजट को 7 महत्वपूर्ण सेक्टर्स – सिचाई एवं ऊर्जा, कृषि एवं समुदायिक विकास, परिवहन एवं संचार, उद्योग के विकास के लिए आवंटित किया गया था। सामाजिक सेवाएँ, भूमिहीन कृषको के पुर्नवास एवं दूसरे सेक्टर्स की सेवाओं में संयोजित किया गया। इसमें प्रदेशो ने आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रकार की भूमिका की जरुरत थी चूँकि आजादी के तुरंत बाद ही देश आधारभूत परेशानियों से घिरा हुआ था जिसमे कम पूँजी एवं बचत करने की क्षमता में कमी थे।

योजना में लक्ष्य वृद्धि दर 2.1 प्रतिशत सालाना रखी गयी थी जिसको 3.6 प्रतिशत रखा गया था। इस दौरान शुद्ध घरेलु उत्पाद 15 प्रतिशत बढ़ गयी थी। इस समय मानसून अच्छा होने की वजह से अच्छी फसले भी उत्पादित हो रही थी और देश के विनिमय में वृद्धि के साथ ही प्रति व्यक्ति आय में भी बढ़ोत्तरी हुई थी। इसी समय विभिन्न सिचाई परियोजनाओं भी शुरू हुई, इनमे प्रमुख थे – भाखड़ा डैम, हीराकुण्ड एवं दामोदर घाटी डैम शामिल रहे थे। इसी योजना में WHO (विश्व स्वास्थ्य संघठन) ने भी केंद्र सरकार से सहयोग करके बच्चों के स्वास्थ्य एवं शिशुओं की मृत्यु दर में कमी पर ध्यान दिया गया। इस प्रकार से अप्रत्यक्ष रूप से देश की आबादी को बढ़ाने में मदद हो गई।

साल 1956 में योजना का समापन होने के पर देश में 5 नए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को भी तकनीकी संस्थानों की तरह शुरू किया था। UGC (विश्विद्यालय अनुदान आयोग) को देश में उच्चतम शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु वित्त के पोषण की देखरेख और उपाय करने हेतु की गयी। 5 इस्पात संयंत्रों की शुरुआत करने को लेकर एग्रीमेंट पर भी हस्ताक्षर हुए जोकि दूसरी योजना के समय पर अस्तित्व में आये थे।

आजादी के बाद से ही पहली पंचवर्षीय योजना माध्यम से ही देश में कृषि के विकास एवं औद्योगिकीकरण की शुरुआत हुई। राष्ट्र के पब्लिक सेक्टर में उभार आया और निजी क्षेत्र में भी एक विशिष्ट प्रणाली को आकार मिला।

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प्रथम पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य

  • योजना में खेती को प्रमुख लक्ष्य बनाया गया था।
  • दूसरे विश्व युद्ध एवं देश के विभाजन से हुई खराब अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना।
  • शरणार्थी पुनर्वास करना
  • स्फीदीकारक प्रवृतियों को रोकना।
  • सडको का निर्माण करना, रेल के इंजन एवं दूसरी वस्तुओं का प्रतिस्थापन और सिचाई एवं विद्युत प्रोजेक्ट को बढ़ावा देना।
  • देश में प्रशासनिक एवं दूसरी संस्थाओं को बनाना जोकि विकास के कार्यक्रमों को चलाने के लिए जरुरी हो।
  • खाद्यान के लिए न्यूनतम तीन वस्तुओं पर निर्भर थे, पहली आत्मनिभर्रता पाना और दूसरा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना।

प्रथम पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • पहली पंचवर्षीय योजना में देश के आर्थिक विकास पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया गया।
  • उस समय के नौजवान अर्थशास्त्री के एन राज ने यह सलाह दी थी कि देश को अपने पहले दो दशकों में ‘धीरे-धीरे’ विकास की ओर जाना चाहिए।
  • पहली योजना में मुख्यतया खेती के ऊपर अधिक ध्यान दिया गया था। बांधों एवं सिचाई के कार्यों में अच्छा निवेश हुआ था। जैसे कि भाखड़ा नांगल डैम परियोजना।
  • ये योजना ‘हैरोड डोमर मॉडल’ के ऊपर आधारित था और इसके अंतर्गत खर्चों में कमी करके बचत क्षमता को बढ़ाने में ध्यान दिया गया था।

दूसरा पंचवर्षीय योजना (1956-1961)

पहली योजना की सफलता से प्रभावित होकर सरकार तुरंत ही दूसरी पंचवर्षीय योजना को शुरू कर दिया गया था। ये योजना महालनोविस मॉडल के ऊपर आधारित थी। इस योजना के अंतर्गत नागरिको की आर्थिक स्थिति में सुधार के प्रयास किये गए। योजना के अंतर्गत कोयला उत्पादन को बढ़ाया गया एवं रेलवे की लाइनों को उत्तर पूर्व से भी जोड़ने का कार्य हुआ। इस प्रकार से दूसरी योजना के अंतर्गत विभिन्न पब्लिक सेक्टर्स का विकास करके एवं तेज गति से औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रीत करने का प्रयास किया गया। इस योजना में साल 1953 में भारत के सांख्यिकी जानकार प्रशांत चंद्र महालनोबीस के द्वारा विकसित किया एक वित्तीय विकास का मॉडल, महालनोबिस मॉडल के ऊपर आधारित थी।

योजना के अधिक समय तक जारी रहने वाले आर्थिक विकास को अधिक से अधिक करने हेतु उत्पादन के क्षेत्रों में मध्य निवेश में इष्टतम आवंटन की कोशिशे हुई। इसके द्वारा संचालन अनुसन्धान एवं अनुकूलन के प्रसिद्ध आधुनिक तकनीकों सहित इंडियन इकोनोमिकल इंस्टिट्यूट में एक मॉडर्न सांख्यकी मॉडल के उपन्यास के एप्लीकेशन को प्रयोग हुए। इस बार एक बंद अर्थव्यवस्था की कल्पना की गई जिसमे मुख्य व्यापारिक क्रियाओं पूँजी आधारित चीजों के आयात पर ध्यान दिया गया।

दूसरी पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत अधारभूत एवं पूंजीगत अच्छे उद्योगों के प्रतिस्थापन की दिशा में एक निर्धारित ध्यान दिया गया था। भिलाई, दुर्गापुर एवं राउलकेला के हाइड्रोइलेक्ट्रिक विद्युत परियोजना एवं 5 स्टील संयंत्र को सोवियत संघ, ब्रिटेन (यूके) एवं पश्चिमी जर्मनी की सहायता से स्थापित हुए। देश में शोध संस्थान की तरह टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च एन्ड एटॉमिक कमिशन ऑफ इण्डिया स्थापित हुआ। साला 1957 में एक छात्रवृति को भी शुरू करके देश के होनहार छात्रों को एटॉमिक एनर्जी के कार्य के लिए प्रशिक्षण देने की शुरुआत हुई।

दूसरी पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत 48 अरब रुपए की कुल धनराशि को बजट के रूप में आवंटित किया गया। ये बजट बहुत से क्षेत्रों के लिए आवण्टित हुआ था जैसे – विद्युत एवं सिचाई, सोशल सर्विसेज, संचार एवं यातायात और दूसरे काम। दूसरी योजना में बढ़ते हुए मूल्य का भी समय रहा था। राष्ट्र को इस दौर में विदेशी मुद्रा की समस्या को भी झेलना पड़ा। देश की आबादी में तेज गति से बढ़ोत्तरी होने पर प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोत्तरी को भी कुछ कम जरूर कर दिया।

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द्वितीय पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य

  • पूरी तरह से भारी उद्योगों पर ध्यान दिया गया।
  • उत्पादन के मामले में भी घरेलु उत्पादन को बढ़ावा दिया गया।
  • ये एक बंद अर्थव्यवस्था थी जिसमे मुख्यरूप व्यापारिक क्रियाओं आयात पूँजीगत वस्तुओं पर ध्यान दिया गया।
  • भारी परियोजना के लिए 5 स्टील मिलो जैसे भिलाई, दुर्गापुर, राउलकेला इत्यादि जगहों पर स्थापित किया गया।
  • योजना में वृद्धि के लक्ष्य को 4.5 प्रतिशत रखा गया था जोकि 4.27 प्रतिशत ही रही।

द्वितीय पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • द्वितीय पंचवर्षीय योजना में ‘तेज गति की अर्थव्यवस्था एवं पब्लिक सेक्टर’ के विकास पर जोर दिया गया था।
  • इस योजना के प्रारूप को बनाने एवं प्लानिंग के काम को पीसी महालनोबिस के अगुवाई में किया गया था।
  • इसके अंतर्गत त्वरित संरचनात्मक बदलाव पर बल दिया गया था।
  • इस बार की योजना में सरकार ने घरेलू इंडस्ट्रीज के बचाव हेतु ‘आयात पर शुल्क’ के अधिरोपण का कार्य किया गया।

तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-1966)

यह योजना साल 1961 से 1966 तक कार्यान्वित रही है जिसके अंतर्गत खेती एवं गेंहू के उत्पादन में सुधारीकरण के ऊपर अधिक जोर दिया गया था। किन्तु साल 1962 के भारत-चीन की लड़ाई के कारण अर्थव्यवस्था की कमजोरियों को सामने लाने एवं रक्षा उद्योग के ऊपर ध्यान देने का कार्य हुआ। योजना के अंत में साल 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध ने देश में मुद्रास्फीति को पैदा किया एवं प्राथमिक मूल्य स्थिरीकरण पर स्थानांतरित कर दी गयी। इसी वर्ष देश में भयानक सूखे के हालात भी पैदा हुए। इस बार की योजना के अंतर्गत सीमेंट एवं उर्वरक संयंत्रों को बी निर्मित किया गया। देश के उत्तरपश्चिमी राज्य पंजाब में भी गेंहू का बहुत अधिक मात्रा में उत्पादन की भी शुरुआत हो गयी।

इसके साथ ही विभिन्न ग्रामीण इलाकों में भी प्राइमरी विद्यालयों की शुरुआत की गयी। देश में लोकतंत्र को ग्रासरूट स्तर पर पहुँचाने के लिए ग्राम पंचायत के चुनाव भी करवाए गए। साथ में प्रदेशों को विकास अधिकाधिक जिम्मेदारी देने के भी कार्य हुए। देश में पहला अवसर था कि IMF से उधार लिया गया। साल 1966 में पहली दफा रुपए के अवमूल्यन भी देखा गया। राज्य विद्युत बोर्ड एवं राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की स्थापना भी हुई। राज्य सड़क परिवहन निगम को स्थापित हुए एवं क्षेत्रीय सड़क निर्माण प्रदेश की जिम्मेदारी हो गए।

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तृतीय पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य

  • इस योजना के अंतर्गत खेती एवं उद्योग की उन्नति पर अधिक जोर दिया गया।
  • साथ ही योजना में खेती को सर्वाधिक प्राथमिकता देने का भी कार्य हुआ।
  • तीसरी योजना के अंतर्गत विकास के लक्ष्य को 5.6 प्रतिशत रखा गया था और इस बार सिर्फ 2.84 प्रतिशत लक्ष्य ही प्राप्त हो सका।

तृतीय पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • देश की खेती एवं गेंहू के उत्पादन में सुधार देखने को मिले।
  • प्रदेशों को विकास से जुड़े अन्य उत्तरदायित्वों को भी दिया गया। जैसे कि प्रदेशों को माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा का कार्यभार दिया जाना।
  • बुनियादी स्तर या ग्रासरूट स्तर पर लोकतंत्र हेतु पंचायत के चुनाव को शुरू किया गया।
  • इस योजना ने तीसरी पंचवर्षीय योजना के असफलता के संकेत दे दिए थे और सरकार को ‘योजना अवकाश’ को घोषित करने की जरुरत पड़ गयी थी।
  • साल 1962 के चीन-भारत युद्ध एवं 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध इस योजना के अवकाश के शुरूआती वजहों में सम्मिलित रहे थे। इसके कारण से ही तीसरी पंचवर्षीय योजना की भी असफलता हुई।
योजनावकाश (1966-1969)

तीसरी पंचवर्षीय योजना की विफलता से ‘योजना अवकाश’ की घोषणा कर दी। इन तीनों वर्षों के काल के दौरान तीन वार्षिक योजनाओं को भी बनाया गया। इसी बीच साल 1966-67 में देश में दुबारा सूखे की विपदा आई। खेती एवं इससे जुडी गतिविधियों और औद्योगिक क्षेत्र को बराबर प्राथमिकता देने का कार्य हुआ। केंद्र सरकार ने देश के निर्यात में वृद्धि करने हेतु ‘रूपये एक अवमूल्यन’ की भी घोषणा की।

चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-1974)

देश में चतुर्थ पंचवर्षीय योजना को प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी जी ने 1969 में शुरू किया। योजना में धन एवं आर्थिक शक्ति के संकेद्रण वृद्धि की पुरानी स्थिति को सही करने का उद्देश्य भी रखा। योजना को उन्नति एवं अन्तनिर्भर होने के लिए गाडगिल सूत्र को अपनाया गया। सर्वप्रथम बफर स्टॉक की अवधारणा की पेशकश हुई एवं 50 लाख टन खाद्य पदार्थ के बफर स्टॉक की परिकल्पना सामने आई।

इस योजना के अंतर्गत देश के 14 प्रमुख बैंकों के राष्ट्रीयकरण का महत्वपूर्ण कार्य हुआ था। इसके अतिरिक्त हरित क्रान्ति से अच्छी खेती भी हुई थी। इसी योजना में इंदिरा गाँधी ने ‘गरीबी हटाओं’ का नारा दिया। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान स्थितियाँ काफी विषम होती जा रही थी। इसी समय बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए इंडस्ट्रीज डेवलोपमेन्ट के लिए तय किये फण्ड को भी युद्ध के लिए भेजा था।

स्थिरता के विकास लक्ष्य को पाने एवं खेती के विकास हेतु गहन कृषि विकास प्रोग्राम को स्वीकृत किया और PDS को भी संघठित किया गया। देश में आत्मनिर्भरता लेन के लिए आयात प्रतिस्थापक को ज्यादा बल दिया गया। वित्तीय शक्ति के केंद्रीकरण की रोकथाम हेतु MRTP Act एवं अविकसित इलाको में इंडस्ट्रीज को स्थापित किया गया।

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चौथी पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य

  • वित्तीय उन्नति को प्रमुखता देना।
  • खाद्य पदार्थ एवं रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्राप्त करना।
  • देश की अर्थव्यवस्था में स्थिरता को स्थापित करना।
  • योजना में आत्मनिर्भरता को आधिकारिक रूप से प्राप्त किया गया।
  • योजना में 5.7 प्रतिशत लक्ष्य को निर्धारित किया गया किन्तु 3.3 प्रतिशत की ही प्राप्ति हुई।

चौथी पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • इस योजना को पीएम इंदिरा गाँधी के समय में जारी किया गया था और इसके द्वारा पुरानी असफलताओं को सुधारने की भी कोशिशे हुई।
  • इस योजना को गाडगिल सूत्र के अनुसार स्थिरता के साथ उन्नति एवं आत्म निर्भरता की ओर ज्यादा बल दिया गया।
  • केंद्र सरकार ने देश के प्रमुख 14 बैंकों के राष्ट्रीयकरण का कार्य किया और ‘हरित क्रांति’ के माध्यम से खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया था।
  • 1972-73 में सूखे की संभावनाओं से ग्रसित इलाकों में कार्यक्रम (DPAP) को शुरू किया गया।

पाँचवी पंचवर्षीय योजना (1974-1979)

पांचवीं पंचवर्षीय योजना में रोजगार, गरीबी में कमी एवं न्याय आदि पर विशेष बल दिया गया। साथ ही योजना में खेती के उत्पादन एवं रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के ऊपर ध्यान देने का प्रयास हुआ। साल 1978 में नयी चुनी गयी सरकार के पीएम मोरारजी देसाई ने योजना को निरस्त कर दिया। इनकी सरकार ने योजना को एक साल पहले ही ख़त्म कर दिया। साल 1975 में विद्युत आपूर्ति अधिनियम में भी बदलाव हुए इस प्रकार से सरकार ने बिजली के उत्पादन एवं वितरण का कार्य भी शुरू किया। 2 अक्टूबर 1975 के दिन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को स्थापित किया गया।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग सिस्टम के शुरू होने से परिवहन की समस्या को समाप्त करने के लिए सड़को के चौड़ीकरण का भी कार्य हुआ। साल 1975 में बीस सूत्रीय कार्यक्रम का भी आरम्भ हुआ जिसको साल 1975 से 1979 तक जारी किया गया।

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पाँचवी पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य

  • देश में नागरिको के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना।
  • खेती एवं रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।
  • योजना में 4.4 प्रतिशत विकास दर के लख्य को तय किया गया और इसकी वृद्धि दर 4.9 प्रतिशत रही।

पाँचवी पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • इस योजना में रोजगार में वृद्धि एवं गरीबी में कमी पर जोर देने पर ध्यान दिया गया।
  • साल 1975 में विद्युत आपूर्ति अधिनियम में बदलाव किये गए इससे भारत सरकार विद्युत के उत्पादन एवं पारेषण के सेक्टर में भी कार्य करने लगी।
  • देश में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग सिस्टम को भी शुरू किया गया।
  • आधारभूत जरूरतों को पूर्ण करने के उद्देश्य से योजना के पहले साल में ‘न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम’ की शुरुआत हुई। MNP को डीपी धर को बनाया था।
  • साल 1978 में पीएम मोरारजी देसाई की सरकार ने इस योजना को निरस्त किया था।
रोलिंग प्लान (1978-1980)
  • ये समय एक अस्थिरता की स्थितियों से भरा हुआ था। इसी दौर में जनता पार्टी की सरकार ने पाँचवी पंचवर्षीय योजना को निरस्त किया था एवं नयी छठीं परियोजना को पेश किया था। इसके बाद साल 1980 में दुबारा पीएम बनकर इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कॉंग्रेस ने इस योजना को रद्द किया था।
  • रोलिंग प्लान का अर्थ ऐसी योजना से है जिसके अंतर्गत योजना की उपयोगिता का आंकलन सालाना स्तर पर होता है। इसके बाद इस आंकलन के अनुसार ही नए साल की योजना को तैयार करने के कार्य होते है।
  • इस प्रकार से रोलिंग प्लान के द्वारा योजना में बजट आवण्टन एवं लक्ष्य के नवीनीकरण का कार्य होता है।

छठीं पंचवर्षीय योजना (1980-1985)

छठीं पंचवर्षीय योजना को देश के आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की तरह से चिन्हित किया गया। इस प्रकार से अब नेहरूवादी योजना की समाप्ति हो चुकी थी। इस समय काल में इंदिरा गाँधी ही देश की पीएम रही थी और योजना को दो बार निर्मित करने के कार्य हुए। जनता पार्टी ने साल 1978-83 के बीच ‘अनवरत योजना’ का निर्माण किया। किन्तु साल 1980 में ही इंदिरा गाँधी ने पीएम रहते इस योजना को समाप्त करके दूसरी छठीं पंचवर्षीय योजना को शुरू कर दिया। इस योजना का कार्य समय 1980-85 के मध्य रहा। इसके बाद जनता पार्टी एक प्रतिमान के स्थान पर पुणे नेहरू प्रतिमान को स्वीकृति दी गयी। इस योजना के अंतर्गत ध्यान दिया गया कि अर्थव्यवस्था को फैलाव देकर ही अधिकतर समस्याओं से निजात पाना संभव है।

इसी वजह से छठीं पंचवर्षीय योजना को छठीं योजनाएँ भी कहते है। देश की बढ़ती आबादी की रोकथाम के उद्देश्य से hhhh कर्म में परिवार के नियोजन को बढ़ावा दिया गया। इस काम के लिए पडोसी देश चीन की एक बच्चा सख्त एवं बाध्यकारी नीति के विपरीत भारत में बल प्रयोग की नीति पर विश्वास नहीं करता था। देश के समृद्ध क्षेत्रो में कम समृद्ध क्षेत्रों की तुलना में परिवार नियोजन को ज्यादा अपनाया गया। इसमें आधुनिकीकरण शब्द का पहली बार इस्तेमाल हुआ और साथ ही रोलिंग प्लान की भी अवधारणा का विकास भी हुआ। इसको सबसे पहले गुन्नार मिर्डल ने अपनी किताब ‘एशियन ड्रामा’ में दिया था। इसको देश में कार्यान्वित करने का श्रेय ‘प्रो. डी टी लकड़वाल’ को दिया जाता है।

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छठीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य

  • देश की अर्थव्यवस्था के विकास में तेज़ी लाना एवं उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल में कुशलता एवं उत्पादकता में बढ़ोत्तरी करना।
  • ऊर्जा के क्षेत्र में देशीय संसाधनों में विकास करके प्रयोग में लाना।
  • गरीबी एवं बेरोज़गारी के असर में कमी करना।
  • स्वैक्षिक स्वीकृति के माध्यम से परिवार नियोजन के कार्यक्रम में गति करना।
  • पर्यावरण के बचाव एवं विकास के निर्धारित लक्ष्यों के बीच सामंजस्य बनाना।
  • विकास के कार्यों में देश के सभी नागरिको की भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • इस योजना में विकास की दर को 5.2 प्रतिशत रखा गया जिसमे से प्राप्त विकास दर 5.7 प्रतिशत रही।

छठीं पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • इस योजना में मूल्यों के नियंत्रण की समाप्ति के द्वारा ‘आर्थिक उदारीकरण’ को शुरू किया गया था।
  • यह योजना ‘नेहरूवादी समाजवाद’ की समाप्ति की तरह देखी जाती है।
  • देश की आबादी को नियंत्रण में लाने के लिए ‘परिवार नियोजन’ के कार्यक्रम भी शुरू हुए।
  • ‘राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक’ यानी नाबार्ड को शिवरमन समिति की शिफारिश पर स्थापित किया गया।

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सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-1990)

देश की सातवीं पंचवर्षीय योजना को सत्ता में कांग्रेस पार्टी की वापिस आने के रूप में भी देखा जाता है। योजना को उद्योगों की उत्पादकता स्तर को बेहतर करने के लिए प्रौद्योगिकी के उन्नयन पर बल देती थी। इस योजना का ध्यान भी आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि करना ही रहा। खाद्यान्न का उत्पादन एवं रोजगार के मौके निर्मित करके विकास को सुनिश्चित करना था। इसके पिछली पंचवर्षीय योजना में परिणाम की तरह वहां खेती, मुद्रा स्फीति की दर को काबू करके सातवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत आर्थिक विकास हेतु जरुरत को निर्मित करके ठोस आधार दिया था। सातवीं योजना में समाजवाद एवं ऊर्जा के निर्माण की ओर काफी कोशिशे हुई थी।

इस योजना के मुख्य क्षेत्र सामाजिक न्याय, वंचितों का उत्पीड़न में कमी, मॉडर्न टेक्नोलॉजी का प्रयोग, खेती का विकास, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम, भोजन, कपडे एवं आवास की पूर्ति को शत-प्रतिशत करना, छोटे उद्योगों की उत्पादकता में बढ़ोत्तरी, वृहद पैमाने पर कृषक विकास।

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सातवीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य

  • देश की गरीबी को कम करना, अंतर्वर्गीय, अंतरक्षेत्रीय एवं गांव और शहरों की विषमताओं में कमी करना।
  • उत्पादक रोजगार में वृद्धि करना एवं खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता लाना।
  • शिक्षा, चिकित्सा, पोषक-आहार, स्वछता एवं आवास की सुविधाओं में विकास करना।
  • निर्यात को बढ़ाकर आयत में कमी के द्वारा अंतनिर्भरता प्राप्त करना।
  • परिवार नियोजन में छोटे परिवार के सिद्धान्त में स्वेच्छा से अमल करना एवं सामाजिक-आर्थिक क्रियाकलापों में स्त्रियों की सकरात्मक भूमिका तय करना।
  • योजना में विकास दर को 5 प्रतिशत तय किया गया और 6.01 प्रतिशत की विकास दर प्राप्त हुई।

सातवीं पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • इस बार की योजना को पीएम राजीव गाँधी के समय में शुरू किया गया।
  • इसमें प्रौद्योगिकी के प्रयोग से इंडस्ट्रीज उत्पादकता के स्तर में सुधारीकरण पर बल दिया।
  • दूसरे लक्ष्यों में आर्थिक उत्पादकता में बढ़ोत्तरी, खाद्यान्न उत्पाद में बढ़ोत्तरी एवं सामजिक न्याय देने के साथ ही रोजगार के निर्माण में कार्य किये गए।
  • पिछली पंचवर्षीय योजना से इस बार की योजना को एक ठोस आधार प्राप्त हुए थे।
  • इस योजना में गरीबी हटाने के कार्यक्रम, आधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रयोग एवं देश को एक आजाद अर्थव्यवस्था एक रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया।
  • योजना के द्वारा साल 2000 तक आत्मनिर्भर विकास हेतु पहले से तय किये लक्ष्यों को पाने में ध्यान केंद्रित हुआ।
वार्षिक योजनाएँ (1990-1992)

आठवीं पंचवर्षीय योजना को साल 1990 में तय समय पर शुरू नहीं किया जा सका। इसके बाद के सालों यानी 1990-91 एवं 1991-92 को वार्षिक योजना की तरह से मनाया गया। इसकी प्रमुख वजह बहुत हद तक आर्थिक अस्थरिता रही थी। इसी समय काल में देश को विदेशी मुद्रा भण्डार की समस्या से भी जूझना पड़ा। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने देश में आर्थिक परेशानियों को दूर करने हेतु उदारीकरण, निजीकरण, वैश्विकरण की शुरुआत की।

आंठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-1997)

देश में 1989-91 में एक प्रकार की आर्थिक अस्थिरता का समय रहा था जिस कारण से कोई पंचवर्षीय योजना नहीं चलाई गयी थी। इस समय पीवी नरसिम्हा राव देश के नौवें प्रधानमंत्री बने। इस समय के वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने देश में मुक्त बाजार सुधार को शुरू किया इससे करीबन दिवालिया हो चुके देश को किनारे पर वापिस ला दिया। अब देश के निजीकरण, उदारीकरण एवं वैश्वीकरण की शुरुआत हो चुकी थी। उद्योगों का आधुनिकीकरण हुआ। देश के घाटे एवं विदेशी ऋण में कमी करने के लिए अर्थव्यवस्था को खोलने की शुरुआत हुई। इसको राव एवं मनमोहन मॉडल भी कहा गया था और इसी दौर में देश विश्व व्यापार संघठन एक सदस्य भी बन गया। योजना में वृद्धि दर को 5.6 प्रतिशत रखी गयी और विकास को चमत्कारिक रूप से 6.8 प्रतिशत तक प्राप्त किया गया।

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आंठवीं पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • इस योजना में ‘उद्योगों को आधुनिक’ करने पर बल दिया गया।
  • इसी दौरान 1 जनवरी 1995 में देश को ‘विश्व व्यापार संघठन’ की सदस्यता भी प्राप्त हुई।
  • योजना के लक्ष्य आबादी को काबू करना, गरीबी उन्मूलन, रोजगार पैदा करना, आधारभूत ढाँचा विकसित एवं सुदृढ़ करना, पर्यटन के प्रबंधन, मानव विकास के संसाधन इत्यादि पर बल दिया गया।
  • शासन के विकेन्द्रीकरण की प्रणाली से पंचायतों एवं नगर पालिकाओं को सम्मिलित करने पर बल दिया गया।

नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002)

देश के पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में आजादी के 50 वर्ष पूर्ण होने पर यह योजना आई। इस बार की योजना में आर्थिक एवं सामाजिक विकास को केंद्र पर रखा गया था। देश में गरीबी के निवारण के प्रयास में सामाजिक क्षेत्र को मजबूर करने के प्रयास हुए। राष्ट्र में गाँव एवं शहर के नागरिको सहित सरकारी एजेंसियों का विकास भी देखा गया। सही समय पर योजना के लक्ष्य को पाने के लिए SAP के उपाय भी किये गए। योजना के लिए कुल सार्वजानिक क्षेत्र में परिव्यय 8,59,200 करोड़ था। कुल परिव्यय में केंद्र का भाग 57 प्रतिशत एवं प्रदेशो का भाग 43 प्रतिशत ही रहा।

योजना देश के नागरिको के आर्थिक विकास एवं जीवन गुणवत्ता के मध्य सम्बन्ध पर केंद्रित रही। देश में गरीबी को कम करने की नीतियों में सुधार करने के मिशन को महत्व दिया गया। इस योजना में समाज में चली आ रही ऐतिहासिक विषमताओं को भी दूर करना था।

अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी

नौवीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य

  • देश की आबादी और गरीबी को नियंत्रित करना
  • खेती एवं ग्रामीण विकास को ध्यान में रखकर रोजगार पैदा करना
  • वंचित नागरिको के लिए खाने एवं पानी को उपलब्ध करना
  • नागरिको को प्राथमिक स्वस्थ सुविधा देना।
  • योजना में 7.1 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य रखा गया किन्तु इस बार सिर्फ 6.8 प्रतिशत ही विकास दर प्राप्त हो सकी।

नौवीं पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में इसी योजना में देश ने अपनी आजादी एवं उन्नति के पचास वर्ष पूर्ण किये।
  • देश ने गरीबी निवारण के लक्ष्य को पाने हेतु सामाजिक क्षेत्रों के लिए समर्थन को पेश किया और आर्थिक विकास को तय करने को लेकर पब्लिक एवं प्राइवेट सेक्टर में साझा कोशिशे भी हुई।
  • तेजी से विकास करने के साथ ही नागरिको के जीवन स्तर के मध्य गुणवत्ता के मध्य सम्बन्ध में संतुलन लाने पर भी ध्यान दिया गया।
  • साथ में दूसरे लक्ष्यों में समाज के वंचित तबके के नागरिको को मजबूर करना, आत्मनिर्भर होने पर विकास करना और राष्ट्र के सभी बच्चों को प्राइमरी शिक्षा भी दिलवाना सम्मिलित किया गया।

दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-2007)

यह योजना नयी शताब्दी में दाल 2002 में शुरू हुई थी। इसके अंतर्गत सरकार ने शिक्षा, नागरिक स्वस्थ एवं रोजगार पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। योजना के बाद के वर्षों में गरीबी निवारण पर भी ध्यान दिया गया। देश में बेरोजगारि को भी दूर करने का लक्ष्य रखा गया। नागरिको की आय को दुगना करके राष्ट्र की वित्तीय स्थिति को दृढ़ करने का विशेष कार्य हुआ। साल 2003 में सभी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिया गया। साल 2001 से 2011 के मध्य में जनसंख्या में 16.2 प्रतिशत की कमी भी देखी गयी। साल 2007 में प्राइमरी शिक्षा को सर्वाधिक ऊँचे स्थान का दर्ज़ा मिला। पिछली योजनाओं की तुलना में कृषि विकास एवं अधिक ऊर्जा खर्च पर ध्यान दिया गया।

shiksha abhiyaan
shiksha abhiyaan

दसवीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य

  • प्रति व्यक्ति 8 प्रतिशत जीडीपी बढ़ोत्तरी पाना।
  • साल 2007 तक गरीबी में 5 प्रतिशत कमी करना।
  • न्यूनतम श्रम शक्ति को जोड़ने हेतु लाभकारी एवं उच्च गुणवत्ता वाला रोजगार देना।
  • दसवें पांच वर्षों में 43,825 करोड़ का व्यय करना।
  • योजना में विकास दर को 8.1 प्रतिशत तय किया गया एवं ये वास्तविक रूप से 7.6 प्रतिशत ही रही।

दसवीं पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • योजना की विशेषता साझा एवं एकसमान विकास में वृद्धि रही थी।
  • देश की जीडीपी को हर साल 8 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
  • योजना के माध्यम से देश की गरीबी में 50 प्रतिशत तक कमी लेन एवं 80 मिलियन नागरिको को रोजगार देना था।
  • साथ ही देश में क्षेत्रीय असमानताओं में भी कमी लाना था।
  • साल 2007 तक शिक्षा एवं श्रम मूल्य दर को लेकर लैंगिक अंतराल में कमी पर बल दिया गया।

ग्यारवीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012)

इस बार की योजना में एकमात्र लक्ष्य सर्वाधिक ‘विकास गति में वृद्धि’ और समावेशी तरीके से विकास को शुरू किया गया। इस समय देश के पीएम डॉ मनमोहन सिंह थे। योजना की प्लानिंग रंगराजन ने तैयार की थी। साल 2012 में योजना के अंतर्गत नदियों और जलीय स्थानों की स्वछता का फैसला किया गया। योजना में कुल बजट 71,731.98 रुपए रखा गया। नागरिको के विकास के लिए प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, आम आदमी बीमा योजना एवं राजीव आवासीय योजना को शुरू किया गया। इस बार की योजना में ‘तेज एवं अधिक समावेशी’ विकास को नारा बनाया गया। साथ ही सभी नागरिको को साफ़ पेय जल भी उपलब्ध करना मिशन रखा गया। योजना की विकास दर का लक्ष्य 9 प्रतिशत रही किया गया किन्तु इस बार विकास दर 8 प्रतिशत ही रही।

Awas-Yojna

ग्यारवीं पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • योजना में उच्च शिक्षा में छात्रों के प्रवेश में वृद्धि करने एवं दूरस्थ शिक्षा के साथ ही आईटी संस्थानों पर बल देने को अपना लक्ष्य बनाया गया। जैसे कि साल 2009 में शिक्षा के अधिकार अधिनियम को पेश किया गया और ये अधिनियम साल 2010 में कार्यान्वित हो गया।
  • अधिनियम ने देश के 6 से 14 साल के बच्चे के लिए शिक्षा को निःशुल्क एवं जरुरी कर दिया।
  • इसकी मुख्य विषयवस्तु तेज एवं ज्यादा साझा विकास रही थी।
  • देश के पर्यावरण में स्थिरता लाना एवं लैंगिक असमानताओं को कम करना।
  • योजना की रूपरेखा को सी. रंगराजन ने प्रारूप दिया था।
  • साल 2009 तक सव्ही नागरिको को साफ़ पानी भी उपलब्ध करवाने पर जोर दिया गया था।

बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-17)

पहले इस बार की योजना में 10 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया था जोकि बाद में कम करने 8 प्रतिशत कर दिया गया। इस बार की योजना में रोजगार एवं शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। योजना की शुरुआत 1 अप्रैल 2012 में हुई थी। इस समय वैश्विक वित्तीय संकट का प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। इस बार की योजना में खेती, इंडस्ट्री, ऊर्जा, यातायात, संचार, ग्रामीण विकास, शहरी एवं ग्रामीण विकास एवं सामाजिक क्षेत्र के स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार एवं कौशल विकास, महिला एवं बाल विकास इत्यादि को सम्मिलित किया गया।

road and highways

बारहवीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य

  • गैर खेती के रोजगार पैदा करना।
  • गरीबी निवारण के काम में तेज़ी लाना।
  • 12वीं योजना को 8 प्रतिशत वृद्धि की स्वीकृति ही मिल पाई।

बारहवीं पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ

  • योजना में तेज, ज्यादा साझा एवं धारणीय विकास को निर्धारित किया गया।
  • देश में आधारभूत ढाँचागत परियोजनाओं को सुदृढ़ करने एवं सभी गांवों में विद्युत की सप्लाई को तय किया गया।
  • विद्यालयों में प्रवेश के समय दिखने वाले लैंगिक एवं सामाजिक अन्तराल में कमी करना एवं उच्च शिक्षा की लोगों तक पहुँच में भी सुधार करना था।
  • साथ ही प्रत्येक वर्ष 1 मिलियन हेक्टेयर में हरित क्षेत्र में बढ़ोत्तरी करना एवं खेती के अतिरिक्त भी नवीन अवसरों का निर्माण करना।

तेहरवीं पंचवर्षीय योजना (2017-2022)

इस योजना में 1964-69 में शुरू हुई रक्षा योजनाओं को शामिल किया गया। इसको ‘डिफेन्स फाइव ईयर प्लान’ भी कहा गया। इसकी जानकारी वित्त मंत्री को भी दी गयी चूँकि मदद के लिए रक्षा बलों को इसकी जानकारी देनी जरुरी रहती है। देश में 15 वर्षों की विज़न डॉक्यूमेंट्री के अंतर्गत ‘आंतरिक सुरक्षा एवं रक्षा’ को भी सम्मिलित किया गया। ये वर्तमान की पंचवर्षीय योजना का भाग नहीं थी। इसकी निगरानी नीति आयोग ने की थी। योजनाओं के द्वारा निवेश को समर्थन देने के प्रयास हुए। सामाजिक न्याय, गरीबी उन्मूलन, रोजगार, आधुनिकरण आदि पर भी कार्य हुआ।

defence scheme

तेहरवीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य

  • विकास दर में वृद्धि करना।
  • योजना में निवेश को बढ़ावा देना।
  • गरीबी हटाना एवं राष्ट्र का समावेशी विकास करना।

पंचवर्षीय योजना से सम्बंधित प्रश्न

देश में पंचवर्षीय योजना किसने शुरू की थी ?

भारत में पंचवर्षीय योजना शुरू करने का श्रेय जवाहरलाल नेहरू को जाता है।

रोलिंग प्लान क्या है?

हर वर्ष योजना का मूल्यांकन करने नए साल की योजना तैयार करना।

पंचवर्षीय योजना कब से शुरू हुई?

पंचवर्षीय योजना 1952 से शुरू की गयी थी।

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