Hindi Patra Lekhan – पत्र लेखन | Format | प्रकार | उदाहरण।

Hindi Patra Lekhan– किसी भी छात्र, व्यक्ति, नौकरशाह अथवा व्यापारी के लिए पत्र लेखन एक विशेष योग्यता होती हैं। पत्र लेखन की बेहतरीन कला के माध्यम से व्यक्ति अपना सन्देश अपने प्रियजनों, मित्रों, रिश्तेदारों एवं आधिकारिक लोगों तक अच्छे से पहुंचा सकता हैं। पुराने समय में सन्देश या अपने विचारों का सम्प्रेषण एक जटिल कार्य होता हैं जो कि ख़ास व्यक्तियों अथवा सन्देश वाहक कबूतरों के माध्यम से करना पड़ता था। किन्तु तकनीक एवं विज्ञान की सहयता से कम खर्च वाली पाठ्य एवं लेखन सामग्री की सहायता से पत्र लेखन (Patra Lekhan) एक अति प्रभावी सम्प्रेषण माध्यम का रूप ले चुका हैं। किसी भी व्यक्ति को समाज में अपने समग्र विकास के लिए विचारों और लिखने की कला में प्रवीण हो जाना चाहिए।

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Hindi Patra Lekhan

पत्र लेखन एक ऐसी विधा हैं जिसके माध्यम से दो व्यक्ति लिखित रुप में संवाद पूरा करते हैं। इससे व्यक्तियों के बीच सूचनाओं के आदान प्रदान में स्थानों की दूरी की समस्या समाप्त हो जाती हैं। साथ ही पत्रों को कालजयी बनाने के लिए वैसा ही सुरखित रखा जा सकता हैं जो की सामान्य बोलचाल में संभव नहीं होता हैं। मुख्य रूप से सामान्य जनों में दो ही पत्रों को प्रसिद्धि मिलती हैं, पारिवारिक जीवन के पत्र और व्यापारिक कामकाज के पत्र एवं सरकारी/ निजी अधिकारीयों के बीच कार्य संबधित पत्र। लेखक को Hindi Patra Lekhan के समय विषय को ध्यान में रखकर ऐसी भाषा लिखनी चाहिए जिससे उसकी बात प्राप्तकर्ता को पूरी तरह समझ आ जाये।

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लेख का विषयपत्र लेखन
Hindi Patra Lekhan
लाभार्थीपत्राचार करने वाले लोग
श्रेणीशैक्षणिक
राजभाषा की वेबसाइट https://rajbhasha.gov.in/

पत्र लेखन का उद्देश्य (Hindi Patra Lekhan)

वर्तमान समय में लोगो के लिए बातचीत करने और स्थिति जानने के लिए विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के विकल्प उपलब्ध हैं जैसे – टेलीफोन, मोबाइल फ़ोन, ई-मेल, फैक्स इत्यादि। अब प्रश्न यह हैं कि Hindi Patra Lekhan को सीखने की जरुरत क्या हैं? यह अत्यंत आवश्यक हैं चूँकि बहुत से आधिकारक कार्य इसी माध्यम से पूर्ण होते हैं। यदि कोई छात्र विद्यालय नहीं जाता हैं, तब सम्बंधित कारण का विवरण देते हुए अवकाश का प्रार्थना पत्र लिखा जाता हैं। फ़ोन के द्वारा होने वाली बातचीत अस्थाई होती हैं और इसका रिकॉर्ड नहीं बनता हैं।

पत्र व्यवहार अपने आप में एक लिखित प्रमाण के रूप में संगृहीत किया जा सकता हैं। सरकार और निजी संस्थानों के कर्मचारी/अधिकारी अपनी बातचीत एवं जरूरतों इत्यादि को लिखित रूप में पत्र के माध्यम से करने को वरीयता देते हैं। एक अंग्रेजी कहावत के अनुसार पत्र मानव ह्रदय के पटलों को खोलते हैं।

पत्र लेखन के कला के रूप में

आज के समय में पत्र लेखन को “कला” के रूप में जाना जाता है चूँकि पत्रों में लोग अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करते है। साहित्य से सम्बन्ध रखने वाले व्यक्ति तो इसका भरपूर प्रयोग करते है। जो पत्र अपने स्वाभाविक रूप के जितना नजदीक होता है वह उतना ही पढ़ने वाले पर प्रभाव डालता है। पत्रों में सिर्फ कोरे शब्द ही नहीं होने चाहिए बल्कि इसमें कला का सौन्दर्य एवं अंतर्मन की भावनाओं का दर्शन भी होना चाहिए।

Hindi Patra Lekhan पत्र लेखन संबधित महत्वपूर्ण बिन्दु

किसी भी व्यक्ति को पत्र लाभान्वित करने की क्षमता रखते हैं किन्तु इससे लाभ वे लोग ही प्राप्त कर पाते हैं जो परिस्थिति के अनुसार आदर्श पत्र लिखने की कला से परिचित हो। एक गलत या निम्न गुणवत्ता वाला पत्र विशेष अवसर को प्राप्त करने में बाधक हो सकता हैं। पत्र लिखते समय निम्न बिंदुओं को ध्यान में रखने से पत्र को अधिक प्रभाव डालने वाला बना सकते हैं।

Hindi Patra Lekhan

  • भाषा – सर्वप्रथम पत्र में प्रयुक्त भाषा का विशेष स्थान होता हैं, पत्र में लेखक को हमेशा सभ्य और अनाक्रमक भाषा प्रयुक्त करनी चाहिए। पत्र में कृपया/ धन्यवाद आदि शब्दों को लिखकर पाठक के मन को प्रभावित कर सकते हैं। हम कह सकते हैं पत्र को सभ्य और साहित्यिक भाषा ही पाठक को प्रभावित कर देती हैं।
  • संक्षिप्तता – तेज़ी से भागने वाले लोगो के पास बहुत से कार्य होते हैं अतः उनका असमय एक बहुमूल्य वस्तु बन चूका हैं। अतः पत्र लिखते समय व्यर्थ में शब्दों का प्रयोग करने से लेखक और पाठक दोनों को समय के अतिरिक्त व्यय का सामना करना पड़ता हैं। अतः पत्र के विषय से सम्बंधित बातो को सरल शब्दों में व्यक्त कर देना चाहिए।
  • स्वच्छता – पत्र लिखते समय कागज को शुरु से अंत तक साफ रहने देना चाहिए। व्यर्थ की काट-पीट, कागज को मोड़ना, पेन के अनावश्यक निशानों इत्यादि से हमेशा बचना चाहिए। टाइप किये गए पत्र में किसी भी प्रकार की त्रुटि को नहीं होने देना चाहिए, ऐसा ना करने पर पाठक पत्र को लेकर नीरस हो जाता हैं और उसके मन में शंका भी उत्पन्न हो जाती हैं।
  • रोचकता – पत्र में रूचि उत्पन्न ना होने पर पाठक प्रभावित नहीं हो सकता हैं। अतः पत्र को लिखते समय शुरू व अंत में पाठक के स्वभाव को ध्यान में रखते हुए लेखन करना चाहिए। पाठक को इंगित करते हुए विशेष शब्दों का प्रयोग अवश्य करना चाहिए जैसे आदरणीय, प्यारे, श्रीमान इत्यादि।
  • उद्देश्य – लेखक को पत्र के मुख्य उद्देश्य से संबधित तथ्यों को ही पत्र के अंतर्गत सम्मिलित करना चाहिए। पाठक का ध्यान उद्देश्य पर रहे यह बहुत ही आवश्यक हैं चूँकि पत्र का अंतिम लक्ष्य पाठक का ध्यान उद्देश्य पर केंद्रित करना हैं।
  • पत्र में सरल भाषा का प्रयोग करें, अपने वाक्यों को छोटा बनाए। पत्र में दो या तीन अनुच्छेद हो और शब्द सीमा अधिकतम 150 अथवा 200 शब्दों के बीच रखनी चाहिए।

पत्र लेखन का महत्व (Hindi Patra Lekhan)

Hindi Patra Lekhan

  • अन्यत्र स्थानों में निवास करने वाले संबंधियों एवं व्यापारियों को आपसी सम्बन्ध को जारी रखने में पत्र विशेष योगदान देता हैं।
  • सूचनाएँ निजी हो अथवा व्यक्तिगत इनको सम्प्रेषित करने मे पत्र लेखन आदर्श हैं। इच्छा, परेशानी, पीड़ा, प्रेम, उल्लास, निर्देश इत्यादि को दूसरों तक पहुँचाने में पत्र लेखन बहुत उपयोगी हैं।
  • पत्र के पहुंचने तक लेखक और पाठक के मध्य पत्र के विषय की गोपनीयता शतप्रतिशत बनी रहती हैं। इसका अर्थ हैं कि इस दोनों के अतिरिक्त कोई अन्य व्यक्ति पत्र का पढ़ नहीं सकता हैं।
  • शिक्षक, व्यापारी, आधिकारिक, प्रबंधक, ग्राहक एवं अन्य विशेष व्यक्तियों से सुचना अथवा विवरण के देने-लेने में पत्र का बहुतायत में प्रयोग होता हैं।
  • वर्तमान समय में व्यवसाय की सेवा-सामान में ग्राहकों और हिस्सेदारों को संतोष देने, व्यापार का नाम बढ़ाने में, व्यवसाय के विस्तार इत्यादि में पत्र महत्वपूर्ण हैं।

पत्र के अंग (Hindi Patra Lekhan)

  • आरम्भ (शुरुआत) – यह पत्र में पते से अभिवादन तक का भाग हैं।
  • मध्य भाग – इसके अंतर्गत पत्र के मल विषय का विवरण होता हैं।
  • अंत (समापन) – पत्र का समापन करते हुए धन्यवाद और प्रेषक का नाम और पता लिखते हैं।

Hindi Patra Lekhan पत्रों का वर्गीकरण

सभी पत्रों को एक ही वर्ग में नहीं रखा जा सकता हैं चूँकि पत्र का विषय, लेखक एवं पाने वाला पत्र का उद्देश्य और कारण निर्धारित कर देते हैं। यदि कारण हैं कि पत्र लेखन के क्षेत्र में कई प्रकार के पत्र लिखे जाते हैं, जैसे कि प्रेम पत्र, निमंत्रण पत्र, वैवाहिक पत्र, संवेदना पत्र, जन्म-मृत्यु के पत्र आदि। हिंदी भाषा के अंतर्गत शैली और शिल्प के अनुसार पत्रों को मुख्य रूप से दो भागो में विभाजित किया हैं।

  • औपचारिक पत्र
  • अनौपचारिक पत्र

औपचारिक पत्र – जिन व्यक्तियों के साथ लेखक का कोई व्यक्तिगत सम्बन्ध ना होकर व्यवसायी अथवा कामकाज का सम्बन्ध होता हैं, इनको पत्र लिखने में लेखक को भाषा, नियम और प्रारूप का सख्ती से पालन करना होता हैं। पत्र में व्यक्तिगत लगाव और अपनापन द्वितीयक रहेगी यद्यपि तथ्य एवं सूचना पर अधिक बल देना होता हैं। लेखक पत्र में व्यर्थ बातों को ना लिखते हुए संक्षिप्तता पर बल देता हैं यद्यपि इसका अर्थ यह नहीं होता हैं पत्र में अधिक सांकेतिक विवरण हो। इस वर्ग में निम्न पत्र सम्मिलित होंगे –

  • आवेदन पत्र।
  • व्यावसायिक पत्र
  • अव्यावसायिक संस्था के लिए पत्र
  • सरकारी अथवा कार्यालयी-पत्र

अनौपचारिक पत्र – यह सामान्य जन में सर्वाधिक प्रचलित रहने वाले पत्रों में से एक हैं। इन पत्रों में लेखक अपने सुख-दुःख और जीवन की घटनाओ- विचारों को विस्तृत रूप में लिखकर अपने परिजन को पहुँचता हैं। इस प्रकार के पत्र परिजनों, मित्रगण और निकटतम सम्बन्ध रखने वाले व्यक्तियों को लिखे जाते हैं। इसमें लेखक को भाषा के सम्बन्ध में मनमानी करने की स्वतंत्रता मिलती हैं। साथ ही पत्र में असीम शब्दों का प्रयोग करके विषय की लम्बाई को भी अधिक किया जा सकता हैं। अनौपचारिक पत्र को मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए लिखा जाता हैं –

  • लेखक का पता और तिथि का वर्णन – पत्र के बाये भाग में सबसे ऊपर की ओर पत्र लेखक अपना नाम और तिथि का विवरण देता हैं। पहले अपना पता लिखे फिर इसके नीचे तिथि लिखे।
  • सम्बोधन – उस व्यक्ति के लिए सम्बोधन जिसे पत्र लिख रहे हो।
  • अभिवादन – तिथि के ठीक नीचे पत्र पाने वाले व्यक्ति की उम्र और सम्बन्ध के अनुसार अभिवादन सूचक शब्द लिखे।
  • पत्र का कलेवर – यह पत्र की सामग्री के लिए मुख्य भाग हैं जिसके अंतर्गत हम जो कुछ भी प्रेषित करना चाहते हो, उसको इसी अंश में लिखते हैं।
  • पत्र का समापन – पत्र को पाने वाले व्यक्ति के लिए एक अच्छा अभिवादन शब्द अथवा ज्ञापित देकर समाप्त करना हैं।
  • स्वनिर्देश – पत्र के अंतिम चरण में पत्र लेखक अपने विषय में विवरण देता हैं। इसमें पत्र पाने वाले व्यक्ति से सम्बन्ध एवं अपनी उम्र को ध्यान में रखना होता हैं।

Hindi Patra Lekhan औपचारिक पत्र की रूपरेखा

  • पत्र को बाये से दायी ओर लिखने की शुरुआत करनी होती हैं। इसको सबसे पहले ‘सेवा में’ लिखकर शुरू करते हैं और पत्र प्राप्तकर्ता का नाम उचित सम्बोधन वाले शब्दों श्रीमान, मान्यवर से होता हैं।
  • अगली पंक्ति में पत्र प्राप्तकर्ता के पते “ऑफिस/कंपनी का नाम” को लिखना हैं।
  • इसके बाद पत्र में थोड़ा सा अंतराल ले कर पत्र के विषय का उल्लेख देना चाहिए।
  • इसकी नीचे की पंक्ति में पत्र के पाठक के लिए सम्बोधन लिखना चाहिए जैसे श्रीमान जी आदि।
  • अब अगली पंक्ति से पत्र के मूल विषय की विस्तृत जानकारी लिखना शुरू करें या कह सकते हैं कि पत्र लिखना शुरू कर दें।
  • पत्र में मूल विषय का विवरण पूर्ण होने के बाद पाठक को सम्बोधन देने वाले शब्द “भवदीय, आपका आभारी/आज्ञाकारी” इत्यादि शब्द लिखने होते हैं।
  • इसके नीचे की पंक्ति में पत्र भेजने वाले का “नाम/कंपनी का नाम, पता, दिनाँक” को लिख देते हैं।
  • अंत में पत्र लिखने वाले के हस्ताक्षर के साथ पत्र लेखन को समाप्त कर देते हैं। letter writting official letter

अनौपचारिक पत्र लिखने के उद्देश्य

  • अनौपचारिक पत्र मुख्य रूप से अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों, रिश्तेदारों को निजी बाते एवं सूचना देने के लिए लिखे जाते है।
  • ये पत्र किसी निजी व्यक्ति को शुभकामनाएँ, दुःखद सूचना, शादी, जन्म-दिन, नाम-संस्कार आदि के लिए भी इसी प्रकार के पत्रों का प्रयोग करते है।
  • इन पत्रों में ख़ुशी, पीड़ा, उल्लास, नाराजगी, सलाह, सहानुभूति आदि को दर्शाया जाता है।
  • सभी प्रकार से अनौपचारिक कामों में अनौपचारिक पत्र इस्तेमाल होते है।

सरकारी अथवा कार्यालयी पत्र लेखन Hindi Patra Lekhan

कार्यालयी पत्र के नाम से ही हमें पत्रों का सम्बन्ध सरकारी कार्यालयों में लिखे जाने वाले पत्रों से मिलता हैं। यह पत्र सरकार के केंद्रीय कार्यालय और प्रादेशिक सरकारी कार्यालय से प्रेषित होते हैं। इस प्रकार के पत्र सरकार द्वारा विदेशी प्रशासन को, प्रदेश सरकार को, अन्य संघठनो को, राजकीय संस्थानों एवं व्यक्तियों के लिए प्रेषित होते हैं। यह पत्र सरकार के विभागों एवं निजी स्तर के व्यक्तियों को लिखे जा सकते हैं। इन पत्रों में यदि भारत सरकार का आदेश और विचार का प्रस्तुति होगी तो उनके प्रारम्भ में “मुझे निर्देश दिया गया हैं”……..। इन पत्रों में अधिकरियों के लिए सिर्फ “महोदय” शब्द से सम्बोधन देना चाहिए। सरकारी पत्र का लेखन निम्न स्तरों पर किया जाता हैं –

  • पत्र का क्रमांक अथवा संख्या।
  • भेजे जाने वाले कार्यालय का नाम।
  • भेजने वाले का नाम एवं पद।
  • प्राप्तकर्ता का नाम एवं पद।
  • पत्र लिखने का स्थल और तिथि।
  • पत्र का विषय।
  • सम्बोधन।
  • पत्र का कलेवर।
  • अपना सम्बोधन।
  • लेखक के हस्ताक्षर।
  • संलग्नो का विवरण।
  • प्रेषित प्रतिलिपियों का विवरण।
कार्यालयी पत्र (सरकारी) पत्र का प्रारूप

पत्र संख्या- अ। 112। 8 । 21

भारत सरकार

शिक्षा मंत्रालय

प्रेषक-

दीपक कुमार

सचिव, भारत सरकार

प्रेषित –

सेवा में,

मुख्य सचिव

राजस्थान सरकार

जयपुर

नयी दिल्ली दि० 22-03-2022

विषय – वेतनमान हेतु

महोदय,

भवदीय

(मनोज सिंह)

सचिव, भारत सरकार

संलग्न-परिपत्र

श्री अवदेश सिन्हा

मुख्य सचिव

राजस्थान सरकार, जयपुर

सं०-

जानकारी हेतु प्रतिलिपियां प्रेषित-

1 ——————————–

2 ——————————–

अधिसूचना की जानकारी

  • इनका प्रयोग मुख्यतया आदेशों को मान्य करने, नए अधिकार देने, नियुक्ति देने, राजपत्रिक अधिकरियो को अवकाश प्रदान करने, स्थानांतर की सूचना देने इत्यादि की सूचना देने में होता हैं।
  • इन सभी अधिसूचनाओं का प्रकाशन गजट (राजपत्र) में होता हैं।
  • जो सूचना गजट में प्रकाशित होंगी उनका स्पष्टरूप से निर्देश होते हैं। अति आवश्यक सूचनाओं विशेष राजपत्र के माध्यम से शीघ्रता से प्रकाशित किया जाता हैं।
  • केंद्र सरकार के अतिरिक्त प्रदेश सरकार भी राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित करती हैं। यदि कार्यालय इकाई भी अपना गजट निकलना चाहती हो तो वे भी अधिसूचनाएँ प्रकशित कर देती हैं।
  • विशेष गजट के माध्यम से सामग्री प्रकाशन की अनुमति संयुक्त सचिव अथवा समकक्ष अधिकारी देते हैं।
  • अधिसूचना को किसी भी व्यक्ति विशेष के नाम को सम्बोधित करके नहीं लिखा जाता हैं यद्यपि इसको अन्य पुरुष को इंगित करके लिखनी होती हैं।hindi letter writting - adhisuchna

पत्र लेखन विधा सम्बन्धी मुख्य बिंदु Hindi Patra Lekhan

  • पत्रों के माध्यम से मानव समाज में अपने भावों एवं सोच को दूसरे व्यक्तियों तक लिखित माध्यम से पंहुचा पाता हैं। व्यापार, कार्यालय,साहित्य, समाज, शिक्षा आदि से सम्बंधित व्यक्ति अपनी बाते पत्र के माध्यम से उपयुक्त व्यक्ति/स्थान तक पंहुचा पाते हैं।
  • छात्रों के जीवन में पत्र विशेष स्थान रखते हैं। विद्यालय से अवकाश प्राप्त करना, शुल्क में छूट, विद्यालय बदलने/ छोड़ने, छात्रवृति लेने, नौकरी का आवेदन, चरित्र प्रमाण पत्र आवेदन इत्यादि में पत्र अतिआवश्यक भूमिका निभाते हैं।
  • पत्र में सिर्फ विषय का परिचय नहीं मिलता हैं अपितु एक लेखन दर्पण की तरह लेखक के व्यक्तित्व और मन का सम्पूर्ण बिम्ब दिखता हैं। इससे बाहरी जगत के व्यक्ति प्रभावित होते हैं।
  • पत्रों को जितना अधिक कुशल और कलात्मक ढंग से लिखे जायेगे उतने अधिक सन्देश देने की क्षमता में बढोत्तरी होगी। साथ ही पत्र लिखे जाने का उद्देश्य पूर्ण कर पाएंगे।
  • प्रायः यह धारण हैं कि पत्र लेखन में कोई विशिष्ट प्रयास की आवश्यकता नहीं हैं परन्तु यह मिथ्या सोच हैं। अकुशल पत्र लेखक अपने पत्रों से विषम परिस्थितियाँ बना सकता हैं और कई बार तो हास्य या विचित्रता का विषय बन जाता हैं।

अनौपचारिक पत्रों के उदाहरण Hindi Patra Lekhan

  • विद्यालय की ओर से मसूरी भ्रमण के लिए छात्रों के समूह के साथ जाने के लिए पिताजी से अनुमति माँगने के लिए पत्र

छात्रावास भवन

देहरादून

2 जनवरी 2022

पूज्य पिताजी

सादर प्रमाण!

पिताजी! मैं परमात्मा से यही कामना करता हूँ कि मैं छात्रावास में प्रसन्न एवं स्वस्थ रहते हुए आशा करता हूँ कि आप सभी लोग घर में कुशल मंगल होंगे। इस महीने के अंतिम सप्ताह में वार्षिक परीक्षा संपन्न होने के बाद हमारी कक्षा के छात्रों का एक समूह पास के शहर मसूरी में शैक्षिक भ्रमण के लिए जा रहा हैं। हमारे साथ हमारे कक्षा प्रमुख, पीटीआई , एवं अन्य तीन अध्यापक होंगे। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य छात्रों को मसूरी शहर के भौगोलिक एवं ऐतिहासिक पृष्टभूमि से परिचित करना हैं। इस भ्रमण का एक अन्य लाभ यह भी होगा कि छात्र “पहाड़ो की रानी” कहे जाने वाली जगह के प्राकृतिक सौन्दर्य का साक्षात्कार करा सकेंगे। इस दल का हिस्सा बनाने के लिए आपकी अनुमति और तीन हज़ार रुपयों की आवश्यकता हैं।

पूज्य माताजी को प्रणाम और ललिता को स्नेह।

शेष सभी सही हैं।

  • दसवीं कक्षा के बाद क्या करना हैं इस सन्दर्भ में अपने चाचाजी को पत्र लिखना

मीराबाई छात्रावास

देहरादून, उत्तराखंड

23 जून 2022

पूज्य चाचाजी

सादर अभिनन्दन!

में भगवान से यही कामना करता हूँ आप सपरिवार घर पर आनंदित होंगे जिस प्रकार से मैं यहाँ छात्रावास में कुशलता से रह रहा हूँ। इस पत्र को लिखने का उद्देश्य आपको अपनी भविष्य की योजनाओं से परिचित करवाना हैं। चाचाजी मेरी दसवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाएँ संपन्न होने वाली हैं और सौभाग्य से मेरे सभी प्रश्न-पत्र अच्छे से हुए है। मैं अपने आगे की शिक्षा विज्ञान वर्ग के अंतर्गत करने की इच्छा रखता हूँ। मैं अन्य विषयों के साथ-साथ जीवविज्ञान विषय पर विशेष ध्यान देना चाहता हूँ। चूँकि मेरा पूरा ध्यान अखिल भारतीय स्तर की चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की तैयारी में लगा हैं। मैं कठिन परिश्रम के द्वारा परीक्षा में सफल होकर एमबीबीएस की पढ़ाई करना चाहता हूँ। इस कार्य में सफलता लेने के लिए आपके आशीर्वाद और ईश्वर की अनुकम्पा की आवश्यकता हैं।

चाचीजी को मेरा प्रणाम और कविता को स्नेह कहना।

शेष सभी ठीक हैं।

आपका भतीजा

विनोद वर्मा

औपचारिक पत्रों के उदाहरण

  • सरस्वती प्रकाशक, दिल्ली में एक प्रूफ-संशोधक के पद के लिए आवेदन पत्र करना

131 , गाँधी नगर, पहली गली

शास्त्री विहार, दिल्ली -23

11 जून 2022

सेवा में,

सर्वश्री सरस्वती प्रकाशन,

21, संत कबीर गली,

वसंत विहार, दिल्ली – 14

प्रिय महोदय,

आज के दैनिक समाचार पत्र “आज की आवाज़” में आपके प्रकाशन से विज्ञापन देखा हैं। जिसको पढने के बाद यह ज्ञात हुआ कि आपको अपने प्रकाशन में प्रूफ-संशोधक की जरुरत हैं। इस पद के लिए में अपना आवेदन पत्र आपकी सेवा में प्रस्तुत करना चाहता हूँ।

मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 2015 में एम.ए. (हिंदी) की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की हैं। इसके बाद वर्ष 2018 में इलाहबाद विश्वविद्यालय से हिंदी उत्तमा “साहित्य रत्न” परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की हैं। मैं पिछले कुछ वर्षो से लक्ष्मी प्रकाशन में प्रूफ संशोधक का कार्य कर रहा हूँ।

मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ यदि आपके द्वारा प्रकाशन में मुझे कार्य करने का अवसर प्राप्त होता हैं, तो में पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ अपने उत्तरदायित्व को पूर्ण करूँगा।

आशा करता हूँ की आप मेरे आवेदन पत्र पर सहानभूति के साथ विचार करेंगे।

सधन्यवाद,

भवदीय

ह. जड़जड़जदज

महेश चंद्र

  • पुराने कर्मचारियों के लिए हिंदी प्रशिक्षण के लिए कार्यभारी अधिकारी को पत्र लिखना।

पत्र संख्या (1)

संख्या-क०ही०।1022। 6। 22

भारत सरकार

गृह मंत्रालय

प्रेषक:-

श्री अरविन्द मित्तल

अवर सचिव

प्रेषित,

श्री कार्यभारी अधिकारी,

हिंदी प्रशिक्षण योजना,

प्रादेशिक केंद्र

विषय :- हिंदी प्रशिक्षण

महोदय,

मुझे यह निर्देश मिला हैं कि हिंदी प्रशिक्षण योजना से सम्बंधित सभी कार्यभारी अधिकारियों को सभी कर्मचारियों को निश्चित समयावधि में हिंदी के कार्यसाधक ज्ञान देने के हेतु शीघ्रता से निम्नलिखित कार्यवाही करने के लिए सूचित करूँ –

  1. विभाग के जिन कर्मचारियों को वर्ष 2019 तक हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान लेना था उन्हें हिंदी भाषा का प्रशिक्षण लेने के लिए भेजा जाए और इन कर्मचारियों की नामवार सूची इस कार्यालय में पहुंचाई जाए।
  2. इस प्रशिक्षण योजना को सफल बनाने के लिए सभी के सक्रीय योगदान की आशा हैं अतः आप अपने कार्यालय के सभी कर्मचारियों को योजना के अंतर्गत हिंदी कक्षाओं में भेजने का दायित्व संभाले।
  3. प्रशिक्षण को कार्यालय के समय पर ही प्रदान किया जायेगा चूँकि यह योजना सरकारी कार्य का ही एक हिस्सा होगी। अतः ध्यान देना हैं कि कोई भी कर्मचारी जानकर इसकी अवेहलना ना करें, उन्हें सूचित किया जाए। यह भी बताये कि इसके अंतर्गत निश्चित परीक्षा को उत्तीर्ण करना अनिवार्य हैं।

इसी वर्ष सितम्बर माह के पहले सप्ताह से हिंदी प्रशिक्षण कक्षाओं को कार्यक्रम के अनुसार कार्यान्वित किया जाए।

भवदीय

(ए० एल० पाठक)

अवर सचिव, भारत सरकार

पत्र लेखन से सम्बंधित प्रश्न

पत्र लेखन क्या होता हैं?

यह एक कला हैं जिसके द्वारा दो व्यक्ति व्यक्तिगत अथवा कामकाजी स्तर पर एक दूसरे से अलग स्थानों पर होते हुए भी विचारो एवं सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।

पत्र लेखन कितने प्रकार का होता हैं?

पत्र को कई प्रकार से उसके उद्देश्य को ध्यान में रखकर वर्गीकृत किया जाता हैं परन्तु मुख्य रूप से पत्र दो प्रकार से लिखते हैं – औपचारिक पत्र एवं अनौपचारिक पत्र।

पत्र प्राप्तकर्ता के पते को कैसे लिखा जाता हैं?

पहले तिथि लिखने के बाद पत्र प्राप्तकर्ता का पता और पद का विवरण देते हैं। साथ ही पत्र के विषय को संक्षिप्त रूप में लिखते हैं।

औपचारिक पत्र के अंतर्गत कौन-से पत्र आते हैं?

इसके अंतर्गत व्यवसाय के पत्र, प्रधानचार्य के लिए पत्र, आवेदन पत्र, सरकारी विभाग के पत्र, सम्पादको के लिए पत्र इत्यादि आते हैं।

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