माइक्रो-एंटरप्राइज – All About Micro-Enterprise: Purpose, Features and Types

सरकार की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) को एमएसएमई अधिनियम-2016 के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। कोरोना महामारी के नुकसान के बाद आर्थिक रूप से स्थिरता लाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सेक्टर (Micro-Enterprise) के लिए 3 लाख करोड़ रुपए के ऋण को देने की बात कही है। इससे देशभर के 45 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इंडस्ट्रीज को लाभ होगा। एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था में बीते 5 दशकों से एक अत्यंत जीवंत एवं गतिशील सेक्टर बनकर उभर रहा है। इस प्रकार से ये सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था के रीढ़ की हड्डी बनता जा रहा है।

एमएसएमई एक प्रकार की योजना होती है और इसका प्रारम्भ छोटे व्यापारों को फायदा देने के लिए होता है। इस स्कीम के द्वारा सरकार की ओर से छोटे उद्योग को सहायता देने का प्रयास होता है। इस योजना के अनुसार छोटे उद्योगों को तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है – सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग। कोई भी छोटी इकाई MSME के रूप में खुद को पंजीकृत करवाकर विभिन्न लाभ ले सकती है। बहुत सी योजनाओं का लाभ पंजीकरण के बिना नहीं लिया जा सकता है।

micro enterprise purpose features and types
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माइक्रो-एंटरप्राइज

एमएसएमई को कम पूंजी पर ही स्थापित किया जा सकता है जबकि बड़े उधोगो को एक बड़ी पूंजी की जरुरत रहती है। और इसमें रोजगार के भी अच्छे अवसर मिल जाते है। देश की आय एवं धन का ज्यादा एकसमान बँटवारा तय करने के लिए, स्थानीय असंतुलन में कमी करना, ग्रामीण एवं पिछड़े इलाको का औद्योगिकी विकास इत्यादि में सहायता मिलती है। MSME को बड़ी इंडस्ट्रीज के लिए एक सहायक इकाई के रूप में जानते है। इस प्रकार से यह सेक्टर देश के सामाजिक एवं वित्त्तीय विकास में बहुत मददगार होता है।

यह सेक्टर कृषि एवं ग्रामीण इडस्ट्रीज डिवीज़न नाम के दो प्रभागों में बंटा हुआ है। डिवीज़न दुसरो के बीच प्रशिक्षण संस्थान में प्रदर्शन एवं क्रेडिट रेटिंग और मदद से जुडी योजनाओं को चलाने के लिए जिम्मेदार है। 7 अप्रैल 2018 के दिन इसके लिए नयी परिभाषा भी मान्य की गई इसको प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मीटिंग में आखिरी रूप प्रदान किया गया। ये बदलाव हो जाने पर अब ‘प्लांट एवम मशीनरी’ में निवेश के स्थान पर ‘टर्नओवर’ के अनुसार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम वर्गीकृत होगा।

एमएसएमई अधिनियम, 2006

सरकार की ओर से सूक्ष्म, लघु एवम मध्यम उद्यम विकास अधिनियम 2006 बनाया गया जो इन उद्योगों के उकसावे एवं उन्नति को आसान एवं सुविधाजनक बनाकर एवं प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है। साल 2006 में 2 अक्टूबर के दिन यह अधिनियम इस क्षेत्र की मांग को पूर्ण करता है। एमएसएमई की परिभाषा को शक्ति देने के अतिरिक्त यह अधिनियम उद्योग में देरी के लिए जरुरी दंडात्मक कार्यवाही की भी बात करता है।

पीएम रोजगार सृजन प्रोग्राम

साल 2011 में एक योजना को पहले की PMRY एवं REJP योजनाओं को एक करके ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ नाम के राष्ट्रीय स्तर की ऋण सम्बंधित सब्सिडी योजना शुरू हुई थी। इस कार्यक्रम में सर्विस सेक्टर के लिए 10 लाख रुपए एवं विनिर्माण सेक्टर के लिए 25 लाख रुपए तक के निवेश वाले माइक्रो उद्योग को स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता देने की योजना है। ये आर्थिक मदद गाँव के क्षेत्रों में परियोजना की कुल लागत की 25 प्रतिशत सब्सिडी (विपन्न केटेगरी सहित खास श्रेणी के लिए 35 प्रतिशत) उपलब्ध करवाई जाती है। और शहर के इलाकों में यह 15 प्रतिशत (विशेष केटेगरी के लिए 25 प्रतिशत) रहती है।

एमएसएमई में रजिस्ट्रेशन पात्र

  • प्रोप्राइटर इकाई
  • सरकारी एवं निजी कंपनियां
  • LLP
  • हिन्दू अविभाज्य परिवार
  • साझेदारी ईकाइयां
  • एक मालिकाना कंपनी
  • को-ओवरटिव सोसाइटी
  • एसोसिएशन ऑफ पर्सन

Micro-Enterprise MSME रजिस्ट्रेशन में जरुरी प्रमाण-पत्र

यदि आप एक ऐसी संस्था से जुड़े है जिसको एमएसएमई के रूप में पंजीकृत कर सकते है तो आपको निम्न प्रकार के प्रमाण-पत्रों को प्रस्तुत करना होगा –

  • उद्योग की शुरुआत का क़ानूनी प्रमाण-पत्र
  • व्यापार का पता प्रमाण-पत्र
  • बिक्री एवं खरीद बिल की कॉपियां
  • औद्योगिक लायसेंस की प्रति
  • मशीनों की खरीद का बिल

एमएसएमई में रजिस्ट्रेशन के बिंदु

  • सभी एमएसएमई को उद्यम तत्र के अनुसार रजिस्टर करना चाहिए। यह 1 जुलाई 2020 से केंद्र एवं प्रदेश सरकारों से रिहायत अथवा फायदा मिलने के लिए पात्र है।
  • स्वघोषणा के अनुसार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जमा कर सकते है। इसमें प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज़, कार्य अथवा प्रमाण-पत्र अपलोड करना जरुरी नहीं है।
  • एमएसएमई वर्गीकरण में प्राथमिक निर्धारित करने वाले फैक्टर्स संयंत्र, मशीनरी एवं उपकरण में व्यवसाय एवं निवेश रहेंगे।
  • पिछले साल के आयकर रिटर्न के अनुसार किसी व्यापार एवं निवेश के कैलकुलेशन में माल, सर्विस अथवा दोनों का निर्यात सम्मिलित नहीं होगा।
  • वैधानिक रूप से ये चैम्पियन नियंत्रण रूम का काम है कि वो उधमियों को उनके प्रारंभिक रजिस्ट्रेशन एवं पुरे देश में संचालन के लिए मदद दें।

Micro-Enterprise MSME रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया

MSME के रूप में रजिस्ट्रेशन करने के लिए आपको आधिकारिक वेबसाइट https://msme.gov.in/hi में जाना है। इसमें ऑनलाइन व्यापार के पंजीकरण हेतु आवेदन कर सकते है। अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान आपने निम्न जानकारी देनी है –

  • आवेदक का नाम, लिंग, ईमेल आईडी एवं मोबाइल नंबर
  • पैनकार्ड
  • आधार कार्ड
  • इकाई का नाम, पता एवं पैन संख्या
  • कार्य करने वाले कर्मचारियों की संख्या, नाम एवं काम शुरू करने की तारीख
  • बैंक की खाता संख्या एवं IFSC कोड
  • उद्योग का प्रमुख काम
  • 2 डिजिट का NIC कोड
  • मशीन खरीदने का विवरण

आवेदन फॉर्म पूरा भर देने के बाद आपने मांगे गए प्रमाण-पत्रों को संलग्न करना है। इसके कुछ ही दिनों के बाद आपका सत्यापन होगा। एक बार सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद आपको आवेदन संख्या के माध्यम से MSME सेर्टिफिकेट दिया जायेगा। इस प्रमाण-पत्र को आपने विभाग के पोर्टल पर जाकर डाउनलोड करना है।

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एमएसएमई रजिस्ट्रेशन के लाभ

बैंक से लाभ मिलेगा

बैंको की ओर से पंजीकृत एमएसएमई को काफी लाभ मिल जाते है जैसे कम ब्याज दर पर बिज़नेस के लिए ऋण सुविधा। एमएसएमई में पंजीकरण के बाद कंपनी के लिए ब्याज की दर सामान्य बिज़नेस की दर से 1 से 1.5 प्रतिशत कम रहती है।

प्रदेश सरकार से रिहायत

इस प्रकार से पंजीकृत इकाइयों को प्रदेश सरकारे औद्योगिक, बिजली एवं कर में सब्सिडी प्रदान करती है। इसके अलावा रजिस्टर कंपनी को खास तौर पर बिक्री टैक्स में रिहायत मिलती है।

कर लाभ

पंजीकृत कंपनी को एक्साइज़ रिहायत स्कीम का फायदा मिलता है। इसके अतिरिक्त कुछ सालों के बाद सीधे करों में भी रिहायत मिलती है। सरकार की ओर से व्यापार की स्थापना में भी मदद मिलती है। इसके अलावा भी बहुत प्रकार की सब्सिडी भी मिलती है। इसका उद्देश्य इन इकाइयों को अधिक से अधिक लाभ कमाने एवं अपने को अच्छे से स्थापना करने में मदद देना है।

केंद्र एवं प्रदेश सरकार से प्रमाणिकता

एमएसएमई पंजीकृत इकाई को अधिक आसानी से सरकार से लायसेंस एवं प्रमाणीकरण मिलता है। सरकार की तरफ से छोटी इकाइयों की सहायता हेतु बहुत प्रकार के सरकारी निविदा एवं टेण्डर भी निकाले जाते है। इनसे लघु व्यापार को हिस्सेदारी में बढ़ावा देने की राह मिलती है।

बैंक से बॉन्ड मुक्त ऋण

सरकार की क्रेडिट गारण्टी फण्ड योजना (CGS) के अंतर्गत नए एवं पुराने उद्योग को शीघ्रता से एमएसएमई व्यापार ऋण दिया जाता है।

एमएसएमई के प्रकार

ये उद्योग वह है जो एक ही परिवार के सदस्यों के माध्यम से पूरी अथवा आंशिक तरह से कार्यान्वित हो जाते है। इस प्रकार के उद्योग नए उधमी एवं नए कारोबार को स्थापित एवं पदोन्नति का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार से ये लोग देश की आर्थिक उन्नति में भागीदारी कर सकते है। सूक्ष्म उद्योगों को दो वर्गों में बाँटा गया है –

  • ग्रामीण कुटीर उद्योग
  • नगरीय कुटीर उद्योग

एमएसएमई का निवेश के अनुसार वर्गीकरण

सरकार ने अधिनियम, 2006 को पारित करके एमएसएमई के उधमों की परिभाषा को निम्न प्रकार से दिया है और किसी उत्पाद के निर्माण या उत्पादन, प्रोसेसिंग या टेस्टिंग के लिए उधम निम्न के अनुसार होंगे –

  • 25 लाख रुपए से कम संयंत्र एवं मशीनरी के लिए निवेश होने पर इसे ‘अति लघु उद्यम’ की श्रेणी में रखते है।
  • 25 लाख रुपए से अधिक एवं 5 करोड़ से कम संयंत्र और मशीनरी के ऊपर निवेश होने पर ‘लघु उद्यम’ की श्रेणी में डाला जायेगा।
  • संयंत्र एवं मशीनरी पर 5 करोड़ से 10 करोड़ रुपए के मध्य निवेश होने पर इसको ‘मध्यम उद्यम’ की श्रेणी में रखा जायेगा।

एमएसएमई का टर्न ओवर के अनुसार वर्गीकरण

विनिर्माण सेक्टर में

  • सूक्ष्म उद्योग – यदि इकाई का वार्षिक टर्न ओवर 5 करोड़ रुपए से कम हो।
  • लघु उद्योग – यदि इकाई का वार्षिक टेरन ओवर 5 करोड़ से 75 करोड़ रुपए के मध्य हो।
  • मध्यम उद्योग – यदि इकाई का वार्षिक टेरन ओवर 75 करोड़ से 250 करोड़ रुपए के मध्य हो।

सर्विस सेक्टर में

  • सूक्ष्म उद्योग – यदि इकाई का वार्षिक 5 करोड़ रुपए से कम हो।
  • लघु उद्योग – यदि इकाई का वार्षिक टर्न ओवर 5 करोड़ से 75 करोड़ रुपए के मध्य हो।
  • मध्यम उद्योग – यदि इकाई का वार्षिक टर्न ओवर 75 करोड़ से 250 करोड़ रुपए के मध्य हो।

एमएसएमई का देश की अर्थव्यवस्था में भागीदारी

  • इस समय देश में करीबन 36.1 मिलियन इकाईयाँ एमएसएमई क्षेत्र में लगी हुई है।
  • देश के करीबन 120 मिलियन नागरिक एमएसएमई से रोजगार के लिए जुड़े हुए है।
  • भारत के निर्यात में 45 प्रतिशत योगदान एमएसएमई के माध्यम से होता है।
  • यह क्षेत्र लगातार 10 प्रतिशत से अधिक सलाना वृद्धि दर को कायम रखे है।
  • देश के विनिर्माण-सकल घरेलू उत्पाद में एमएमएमई 6.11 प्रतिशत एवं सर्विस सेक्टर से आने वाली जीडीपी का 25 प्रतिशत भाग में हिस्सेदारी करता है।
  • एमएसएमई देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में करीबन 8 प्रतिशत की भागीदारी करता है।
  • गाँवों में एमएसएमई की विभिन्न इकाइयाँ स्थित है, इस प्रकार से ग्रामीण नागरिको का शहर की ओर पलायन रुक जाता है।

माइक्रो-एंटरप्राइज से सम्बंधित प्रश्न

एमएसएमई में कौन-से उद्योग है?

इसके कुल उत्पादन में कपडा निर्माण की भागीदारी 8.75% है, खाद्य एवं पेय उत्पाद की भागीदारी 6.94% है। इसके अतिरिक्त दूसरी सेवाओं के लिए 6.2% एवं व्यापारिक गतिविधियों में 3.77%, होटल एवं रेस्टोरेंट में 3.64% की भागीदारी है।

एमएसएमई के क्या लाभ है?

MSME को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम नए व्यापार की शुरुआत के लिए ऋण की सुविधा मिलती है। CGTMSE के अंतर्गत बिना किसी सिक्योरिटी के 2 करोड़ रुपए तक का ऋण मिल जाता है। इसके अलावा एमएसएमई पंजीकरण के बाद सरकार से विभिन्न प्रकार के सीधे लाभ मिलते है जैसे बिजली, कर इत्यादि में सब्सिडी।

देश में कितने MSME है?

एमएसएमई के आंकड़ों के अनुसार नवम्बर, 2022 तक देश के उद्यम पंजीकरण वेब पोर्टल पर 12,201,448 MSME रजिस्टर्ड है। देश के करीबन 12 करोड़ से ज्यादा नागरिक MSME सेक्टर से रोजगार पा रहे है।

एमएसएमई में कौन से व्यापार शामिल होते है?

वे सभी व्यापार जिसमें 30 करोड़ रुपयों का निवेश हुआ है एवं 100 करोड़ रुपए से का टर्नओवर प्राप्त हो रहा है। देश के विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र के व्यापारों को MSME के अंतर्गत रखा गया है।

MSME लोन से क्या अर्थ है?

मसले का मतलब MSME है और इसको विस्तृत रूप में सूक्ष्म, लघु एवम मध्यम उद्योग कहते है।

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